बाबा साहेब और उनके द्वारा लिखी गयी क़िताबें

बाबासाहेब के निजी पुस्तकालय “राजगृह”में 50,000 से भी अधिक उनकी किताबें थी और यह विश्व का सबसे बडा निजी पुस्तकालय था. डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर कुल 64 विषयों में मास्टर थे.

BABA SAHEB

Amit kumar

8/30/20241 मिनट पढ़ें

डॉक्टर अम्बेडकर की किताबें वर्तमान में भारत में अबसे अधिक बिकने वाली किताबों में गिनी जातीं हैं. पाली संस्कृत अंग्रेजी फ्रेंच जर्मन मराठी पर्शियन और गुजराती जैसे ९ भाषाओँ के जानकार थे. इसके अलावा उन्होंने लगभग २१ साल तक विश्व के सभी धर्मों की तुलनात्मक रूप से पढाई की थी.

विश्व के लगभग हर देश में उनके प्रशंसक मौजूद हैं. डॉक्टर अम्बेडकर की सबसे प्रसिद्द पुस्तक "जाति का उच्छेद" है.
बाबा साहब ने देश को 75 साल पहले जन्म लिया था कि हिंदू राष्ट्र किस तरफ को जाएगा या इसके क्या रिश्ते होंगे, आने वाली पीढ़ी किस रास्ते से गुमराह रहेगी

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, भारत के संविधान निर्माता और समाज सुधारक, ने देश और समाज के लिए जो योगदान दिया, वह अतुलनीय है। उन्होंने केवल एक संविधान नहीं दिया, बल्कि दलितों, महिलाओं, और वंचित वर्गों के अधिकारों की नींव भी रखी। उनके विचारों और योगदान ने भारत को एक सशक्त लोकतांत्रिक और समतावादी देश बनाने में मदद की। इसके बावजूद, आज के समय में उनके सम्मान का हनन और उनकी विचारधारा को नजरअंदाज किया जाना चिंताजनक है।

यह स्थिति कई कारणों से उत्पन्न हुई है:

पढ़े-लिखे समाज का असंवेदनशील रवैया: बाबा साहेब ने चेताया था कि अगर समाज असंवेदनशील और जातिगत पूर्वाग्रहों में फंसा रहेगा, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक होगा।

गलत राजनेता और उनकी नीतियां: कुछ राजनेताओं ने बाबा साहेब के विचारों का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए दुरुपयोग किया, जिससे उनकी असली विरासत धुंधली हो गई।

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और गलत सूचनाएं: डिजिटल युग में झूठी खबरें और प्रोपेगैंडा, विशेष रूप से व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए, लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

बाबा साहेब ने अपने समय में ही समाज को उन खतरों के बारे में आगाह किया था जो आज सच्चाई बन चुके हैं:

अचेतन समाज (Unconscious Society): उन्होंने कहा था कि जब समाज में लोग जागरूक नहीं होंगे, तो यह अन्याय को बढ़ावा देगा।

भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा: उन्होंने चेताया था कि लोकतंत्र केवल संविधान से नहीं चलता, यह समाज की मानसिकता पर भी निर्भर करता है।

दलित उत्थान की अनदेखी: उनका सपना था कि हर वंचित व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।

इन चुनौतियों के बावजूद, दुनिया के विभिन्न विश्वविद्यालयों और देशों ने बाबा साहेब की महानता को पहचाना। कोलंबिया यूनिवर्सिटी और अन्य 14 से अधिक संस्थानों ने उनकी मूर्तियां स्थापित कर, उनके नाम पर सड़कें और संस्थान बनाए। यह उनके विचारों और योगदान को सम्मान देने का प्रयास है।

आज, हमें भी उनके विचारों को अपनाने और समाज को जागरूक बनाने की आवश्यकता है। उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि शिक्षा, समानता, और न्याय किसी भी राष्ट्र की आधारशिला होती है। उनका सम्मान करना केवल उनकी मूर्तियों को स्थापित करना नहीं है, बल्कि उनकी विचारधारा को समाज में लागू करना है।

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Team,
Sethpura Junction