
Mass Destruction, सामूहिक विनाश, 2023: सेठपुरा की कहानी
इस ब्लॉग के माध्यम से हमने सेठपुरा में हुए सामूहिक विनाश और उससे जुड़ी समस्याओं को उजागर किया है। उम्मीद है कि यह लेख सरकार और संबंधित विभागों तक हमारी आवाज पहुँचाने में मदद करेगा।
8/28/20241 मिनट पढ़ें


2023 में सेठपुरा गांव में सामूहिक विनाश का मंजर देखने को मिला।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अपने विस्तार के लिए गांव की भूमि और सड़क के रास्ते में आने वाले सभी मकानों को ध्वस्त कर दिया। इसके चलते कई लोग बेघर हो गए और कई लोग अपने घरों से बेदखल हो गए। किसी का आशियाना उजड़ गया तो किसी की दुकान, जिससे उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आज भी लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
यह सब कुछ इसलिए हुआ क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग योजना के तहत सरकार ने सड़क चौड़ीकरण के लिए गांव-गांव में बुलडोजर चलाए। सेठपुरा, जो लगभग 80 साल पहले बसा था, वहां आज से पहले एक शांतिपूर्ण सड़क हुआ करती थी। लेकिन नेशनल हाईवे के निर्माण की योजना के तहत इस गांव को तहस-नहस कर दिया गया।
इस निर्माण के साथ-साथ गांव के चारों ओर की प्राकृतिक सुंदरता भी बर्बाद कर दी गई। लाखों की संख्या में पेड़ काट दिए गए, जो हमारे गांव के आसपास, पुरकाजी से लेकर सेठपुरा तक फैले हुए थे। ये पेड़, जो कई दशकों से हमारी धरोहर थे, जैसे जामुन और सफेदा के पेड़, अब केवल पुरानी यादें बनकर रह गए हैं।
धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाने वाला एक और बड़ा मुद्दा भी सामने आया है। सरकार ने बिना किसी चेतावनी के हमारे रविदास मंदिर को तोड़ दिया, जिसे गांव के लोगों ने 20 सालों तक चंदा इकट्ठा करके बनाया था। यह मंदिर महज 20 मिनट में ध्वस्त कर दिया गया क्योंकि वहां अब रोड बनाना था
इस बड़े निर्माण कार्य के चलते गांव में धूल और मिट्टी की समस्या भी बढ़ गई है। जिम्मेदार विभाग और ठेकेदार इस समस्या को अब तक हल नहीं कर पाए हैं। कमजोर वर्ग के लोग केवल देखते रह जाते हैं या डीएम ऑफिस के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। प्रक्रिया इतनी धीमी है कि आज तक कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।
विकास के नाम पर हुई इस तबाही ने कई समस्याएं खड़ी कर दी हैं।
बेघर परिवार: जो लोग बेघर हुए थे, उन 8 परिवारों का आज तक कोई पुनर्वास नहीं हो पाया है।
पानी की समस्या: गांव में पानी की निकासी का सिस्टम भी बिगड़ चुका है, जो गांव के लिए एक लंबी समस्या बन गई है।
कचरा प्रबंधन: गांव के लोग अपने कूड़े-कचरे को सड़क किनारे डालकर खाद बनाते थे, जो अब संभव नहीं है। इस कारण से कचरा गांव के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। पुन: उपयोग या नष्ट करने का कोई समाधान अभी तक नहीं निकला है, और ग्राम प्रधान को भी इसका कोई उपाय नहीं पता।
ये समस्याएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या यह वाकई विकास है या विनाश? हमें इन मुद्दों का सामना करने के लिए एकजुट होना होगा और अपने गांव की आवाज को बुलंद करना होगा।
धन्यवाद,
सेठपुरा जंक्शन टीम,
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