“संविधान बचाओ, भाईचारा बनाओ — ऐतिहासिक बहुजन रैली 2024
26 नवंबर भारतीय संविधान दिवस पर आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने एक बड़ी रैली आयोजित की, जिसमें सभी वर्गों—दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक, किसान, विद्यार्थी, महिलाएँ और युवा—की भारी संख्या में लोगों ने हाथ में तिरंगा और संविधान की प्रति लेकर एकजुटता भागीदारी दिखाई दी।
NEW INDIABABA SAHEB
Sethpura team
11/29/20251 min read


26 नवंबर संविधान दिवस | GIC ग्राउंड, मुज़फ्फरनगर
भारत का संविधान महज़ एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं—यह आज़ादी, समानता, न्याय और सामाजिक भाईचारे की उस नींव का नाम है, जिस पर आधुनिक भारत खड़ा है।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का ऐतिहासिक योगदान हमें सिर्फ अधिकार नहीं देता, बल्कि यह भी सिखाता है कि एक समतामूलक समाज तभी जन्म लेता है जब oppressed समाज अपनी एकता और जागरूकता को हथियार बनाता है।
संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित “संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ महारैली” इसी चेतना का प्रतीक बन गई।
यह सिर्फ एक रैली नहीं—बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुजन चेतना के पुनर्जागरण का एक बड़ा जन–संकेत रहा।
रैली में ऐतिहासिक जनभागीदारी
GIC ग्राउंड, मुज़फ्फरनगर में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भाग लिया।
वहीं मीडिया रिपोर्ट्स — The Times of India, The Dastak 24 सहित कई प्लेटफॉर्म — ने इसे “मिलीजुली सामाजिक पृष्ठभूमि की ऐतिहासिक एकता” बताया।
कौन-कौन आए?
दलित समाज के बड़े समूह
मुस्लिम समुदाय
OBC (पिछड़ी जातियाँ)
SC/ST समुदाय
किसान, मजदूर, युवा
महिलाएँ और पहली बार राजनीति में रुचि ले रही नई पीढ़ी
हजारों लोगों ने हाथों में तिरंगा और संविधान की प्रति लेकर संविधान की रक्षा और भाईचारे के संकल्प को मजबूत किया।
यह दृश्य सामाजिक एकता की एक दुर्लभ मिसाल था।
रैली का सामाजिक और राजनीतिक संदेश
यह कार्यक्रम एक बात बहुत स्पष्ट कर गया —
बहुजन समाज अब राजनीतिक रूप से पहले से कहीं ज़्यादा सजग, संगठित और assertive हो रहा है।
रैली से निकलते संदेश:
संविधान की रक्षा अब जनांदोलन का रूप ले रहा है।
दलित–पिछड़ा–अल्पसंख्यक समुदाय राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अधिक vocal है।
समाज में बढ़ती असमानताओं और सत्ता के केंद्रीकरण के खिलाफ संगठित प्रतिरोध दिख रहा है।
ASP (कांशीराम) खुद को नए बहुजन वैचारिक विकल्प के रूप में स्थापित कर रही है।
चंद्रशेखर आज़ाद की स्पीच — मुख्य बिंदु
चंद्रशेखर आज़ाद की भाषण ने इस रैली को एक निर्णायक दिशा दी। उनके मुख्य संदेश थे:
1. संविधान की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य
उन्होंने उन ताकतों पर चिंता जताई जो संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।
उन्होंने कहा —
“संविधान बचाना सिर्फ राजनीति नहीं, यह हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाना है।”
2. बहुजन समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी
“शक्ति के बिना सम्मान नहीं”—
उन्होंने कहा कि असली सामाजिक न्याय तभी मिलेगा जब बहुजनों की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
3. शिक्षा, नौकरी और अवसरों की लड़ाई
उन्होंने SC/ST/OBC और गरीब तबकों के शिक्षा व रोजगार अवसरों में बढ़ती असमानता पर बात की और इसे "नई जातीय आर्थिक असमानता" बताया।
4. नई सोच की राजनीति
उन्होंने ASP को “नयी वैचारिक राजनीति” बताया —
जहाँ नफ़रत की जगह संविधान, विकास और भाईचारे की बातें होंगी।
5. सभी समाजों की भागीदारी – बदलते हिंदुस्तान का संकेत
उनकी स्पीच का सबसे बड़ा संदेश यही था कि
“बहुजन राजनीति अब सीमित नहीं रही — अब यह राष्ट्रीय चेतना बन रही है।”
निष्कर्ष
यह महारैली एक इशारा है कि भारत का बहुजन समाज लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए पहले से कहीं अधिक एकजुट होता दिख रहा है।
यह आंदोलन किसी एक पार्टी या जाति का नहीं—
बल्कि समानता, न्याय और भाईचारे में विश्वास रखने वाले हर भारतीय का आंदोलन बन रहा है।
बाबा साहेब ने जो सपने देखे थे —
“एक बराबरी वाला भारत” —
यह रैली उन्हें आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प है।
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